
न आया तरस उन्हें भूल कर भी कभी..
की ख़ाक हो चले हम इंतज़ार में उनके…
वक्त की न कुछ भी कदर उन्हें…
सांझ से फिर हो चली सेहर, इंतज़ार में उनके..
आयेंगे तो कुछ ऐसी अदा से वोह..
की कुछ किया नही, इंतज़ार ने उनके..
बेबस दिल की सदा तो देखिये..
शिकवा भी न कर पाये हम, इंतज़ार में उनके..
आँसू भी पूछ कर आते हैं.. की आ जाएँ क्या हम..
भीगी पलकें बर्दाश्त नही उन्हें, इंतज़ार में उनके..
कत्ल करते हैं वोह, और सज़ा भी हमें ही सुनाते हैं..
अब तो फ़ना हो चले हम, इंतज़ार में उनके

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